*प्रेत श्राप* Pret Sharap Kya hota hai??
*प्रेत श्राप* *जन्म-पत्रिका के किसी भी भाव में शनि-राहू या शनि-केतू की युति हो तो प्रेत श्राप का निर्माण करती है | शनि-राहू या शनि-केतू की युति भाव के फल को पूरी तरह बिगाड़ देती है तथा दलदललाख यत्न करने पर भी उस भाव का उत्तम फल प्राप्त नहीं होता है |वह चाहे धन का भाव हो, सन्तान सुख, जीवन साथी या कोई अन्य भाव | भाग्य हर कदम पर रोड़े लेकर खड़ा सा दिखता है जिसको पार करना बार-बार की हार के बाद जातक के लिए अत्यन्त कठिन होता है | शनि + राहू = प्रेत श्राप योग यानि ऐसी घटना जिसे अचनचेत घटना कहा जाता है अचानक कुछ ऐसा हो जाना जिसके बारे में दूर दूर तक अंदेशा भी न हो और भारी नुक्सान हो जाये | इस योग के कारण एक के बाद एक मुसीबत बडती जाती है यदि शनि या राहू में से किसी भी ग्रह की दशा चल रही हो या आयुकाल चल रहा हो यानी 7 से 12 या 36 से लेकर 47 वर्ष तक का समय हो तो मुसीबतों का दौर थमता नही है |* *कई बार ऐसा भी होता है किसी शुभ या योगकारी ग्रह की दशा काल हो और शनि + राहू रूपी प्रेत श्राप योग की दृष्टि का दुष्प्रभाव उस ग्रह पर हो जाये तो उस शुभ ग्रह के समय में भी मुसीबतें पड़ती...