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*राहू -केतू का प्रभाव-*

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*राहू -केतू का प्रभाव-* *राहु-केतु दोनों ही छाया ग्रह हैं। कुंडली में यह सूर्य एवं चंद्र के साथ ग्रहण योग बनाते हैं। राहु भ्रम और केतु चिंताओं एवं कुल की वृद्धि का सूचक है। कुंडली में इनकी स्थिति जातक के जीवन को बहुत प्रभावित करती है। यह दोनों ग्रह सदैव पीड़ा करक नहीं होते। कुंडली में कुछ भावों और ग्रहों के साथ यह जातक को विशेष शुभ फल प्रदान करते हैं। आइए जानते हैं कैसे राहु और केतु की स्थिति जातक के जीवन को प्रभावित करती है।* *राहू की बिभिन्न ग्रहों से युति के विशेष फल-* *राहू-बुध की युति – संकुचित सोच और झूठ बोलने की प्रवृति।* *राहू-शुक्र की युति – अति कामुक।* *राहू-शनि से युति – तंत्र मंत्र का जानकार किन्तु दरिद्र।* *राहू-गुरू से युति – हठ योगी या योग अभ्यास में कुशल।* *राहू-मंगल से युति – खतरनाक कार्यों को करने वाला।* *राहू-सूर्य – खराब आचरण वाला।* *राहू-चन्द्रमा से युति – जीवनभर मानसिक तनावों से परेशान रहने वाला।* *केतु की बिभिन्न ग्रहों से युति के विशेष फल-* *केतु-बुध की युति – लाइलाज बीमारी देता है। पागल, सनकी, चालाक, कपटी, चोर एवं धर्म विरुद्ध आचरण बनाता है।* *केतु-श...