द्रौपदी ने कभी कहा ही नहीं 'अंधे का बेटा अंधा' महाभारत को लेकर लोक में प्रचलित भ्रांतियों में सबसे अधिक आपत्तिजनक और अक्षम्य भ्रांति है महायुद्ध का आरोप देवी द्रौपदी के उस 'कटु वचन' पर थोप देना जिसमें उन्होंने कथित रूप से दुर्योधन को 'अंधे का बेटा अंधा' कहा था। मान्यता है कि इंद्रप्रस्थ की स्थापना के समय युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में पहुँचा दुर्योधन जब मयदानव निर्मित 'माया भवन' में गिरा तो द्रौपदी ने यह कहते हुए उसकी हँसी उड़ाई थी कि 'अंधस्य अंधो वै पुत्र:!' इस लोकोक्ति के उलट सच तो यह है कि इस तरह की कोई पंक्ति महाभारत में है ही नहीं। न द्रौपदी ने कभी दुर्योधन की हँसी उड़ाई, न अंधे का बेटा कहा। यहाँ तक कि जब दुर्योधन माया महल में गिरा उस समय द्रौपदी वहाँ उपस्थित तक नहीं थी। नारी सम्मान को आहत करने वाली इसी निपट झूठी मान्यता के सत्य की पड़ताल महाभारत के अनेक अध्येताओं ने समय-समय पर की है। इसी कड़ी में जब गीताप्रेस गोरखपुर के छह खण्डों वाले एक लाख 217 श्लोक के ग्रन्थ में मैंने इस 'सत्य' को खोजने का प्रयास किया तो जो प्रमाण मिले वे ...
कोरोनोवायरस के बारे में लोग इतने भयभीत हैं कि वे विक्रेताओं से खरीदे सब्जियों और फलों को धोने के लिए घंटों बिताते हैं। क्या कुछ विशेषज्ञ स्पष्ट कर सकते हैं कि क्या कोरोनोवायर फलों और सब्जियों पर जीवित रहते हैं और यदि हाँ, तो उनसे कैसे छुटकारा पाए? सुबह जल्दी कोई सब्जी खरीदिये और उसे 6 घंटों के लिए छोड़ दीजिए। 6 घंटों के पश्चात वह उतनी ही सुरक्षित होगी, जितनी कोरोना के अस्तित्व में आने के पहले रहती थी। शाम को खरीदने से बचिए, यह दिनभर का बचा हुआ, हर व्यक्ति का छुआ हुआ माल रहता हैं, जो दुकान पर आए और ढेर में से बेहतर चुनकर ले गए। एकबार आपने कोई सब्जी पका ली, उसमे कोरोना के सक्रिय होने का अवसर नहीं होगा। यह उपयोग करने के लिए पूर्णतः सुरक्षित होगी। कच्ची सब्जियां या फल खाने से बचिए, जब भी आप इन्हें घर लाएं। उन्हें फ़्रिज में रखने से बचिए। उन्हें पानी मे भिगोकर रखिए या यदि वे शीघ्र नष्ट होने वाली हों, तो खुले में रखिए। संक्रमण के सर्वाधिक अवसर तब होते हैं, जब आप उन्हें दुकान पर छूते हैं या आप दुकानदार से पैसों का लेनदेन करते हैं। वह प्रतिदिन सैकडों लोगों के संपर्क में आता हैं और प्रतिदिन भीड़ भ...
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